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नर्मदापुरम: तीन साल से अटकी देवरी सिंचाई परियोजना पर किसानों का आक्रोश, मंत्री के आश्वासन के बाद धरना समाप्त

Sun, 25 Oct 2026 07:16 PM IST
नर्मदापुरम ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नर्मदापुरम

देवरी माइक्रो सिंचाई परियोजना में हो रही देरी से नाराज आदिवासी किसानों ने रविवार को करीब 27 घंटे बाद अपना आंदोलन समाप्त कर दिया। केसला ब्लॉक के पथरौटा स्थित मुख्य तवा नहर में उतरकर शनिवार से धरना दे रहे किसानों को अधिकारियों की ओर से परियोजना आठ महीने में शुरू करने की दिशा में कार्रवाई का लिखित आश्वासन मिला। इसके बाद रविवार दोपहर करीब 3:30 बजे किसानों ने धरना समाप्त कर दिया।

जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट ने किसानों को भरोसा दिलाया कि परियोजना से जुड़ी बाधाओं को दूर कर काम आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा, “तुलसी सिलावट जो बोलता है, वह करता है… मैं कमिटमेंट का बहुत पक्का हूं।” मंत्री के आश्वासन के बाद किसानों ने आंदोलन खत्म करने का निर्णय लिया।

तीन साल से अटकी परियोजना, 35 गांवों के किसान परेशान
केसला ब्लॉक की देवरी (दोंडी झुनकर) माइक्रो सिंचाई परियोजना को अक्टूबर 2023 में 154.33 करोड़ रुपये की मंजूरी मिली थी। इसके तहत तवा बांध से पानी लिफ्ट कर करीब 35 गांवों की 10 से 12 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि तक सिंचाई सुविधा पहुंचाने की योजना है। हालांकि, करीब तीन साल बीतने के बावजूद निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका। इस बीच परियोजना की लागत बढ़कर करीब 300 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। सहेली, केसला, ताकू, मोरपानी, धासाई, जालीखेड़ा, मरियारपुरा, दाउडी झुनकर और ओझापुरा सहित आसपास के गांवों के किसानों को पर्याप्त सिंचाई पानी नहीं मिल पा रहा है। टेंडर प्रक्रिया में देरी से नाराज किसानों ने ‘अपना गांव संगठन’ के बैनर तले आंदोलन शुरू किया था। किसानों की मांग थी कि परियोजना को लेकर स्पष्ट समयसीमा के साथ लिखित आश्वासन दिया जाए।

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वीडियो कॉल पर मंत्री से हुई चर्चा
आंदोलन की जानकारी मिलने पर जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट ने मुख्य अभियंता आरआर मीणा को धरना स्थल पर भेजा। मीणा ने किसानों को बताया कि परियोजना की पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति की प्रक्रिया चल रही है। स्वीकृति मिलने के बाद टेंडर जारी किए जाएंगे। हालांकि, किसान काम शुरू होने की स्पष्ट समयसीमा चाहते थे।

इसके बाद प्रदेश भाजपा प्रवक्ता राजेंद्र सिंह ठाकुर ने किसानों और मंत्री के बीच वीडियो कॉल के जरिए बातचीत कराई। इसमें ‘अपना गांव संगठन’ के दुर्गेश धुर्वे, किसान नेता बाबू चौधरी और मुख्य अभियंता आरआर मीणा भी शामिल हुए। किसानों ने मंत्री के सामने अपनी समस्याएं रखीं और परियोजना में हो रही देरी पर नाराजगी जताई। मंत्री ने दुर्गेश धुर्वे के नेतृत्व में किसानों के प्रतिनिधिमंडल को भोपाल बुलाया। उन्होंने कहा कि बैठक में वरिष्ठ अधिकारियों को भी शामिल किया जाएगा, ताकि परियोजना से जुड़ी समस्याओं पर चर्चा कर समाधान निकाला जा सके।

वनभूमि की मंजूरी और बढ़ी लागत बनी बाधा
मुख्य अभियंता आरआर मीणा के अनुसार, परियोजना के कुछ हिस्सों में वनभूमि पर भी काम होना है। आवश्यक स्वीकृतियां नहीं मिलने के कारण टेंडर प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। वहीं, लागत बढ़ने के चलते पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति की प्रक्रिया भी जरूरी हो गई। मंत्री सिलावट ने तकनीकी और प्रशासनिक अड़चनों को दूर कर परियोजना को आगे बढ़ाने का भरोसा दिया। अधिकारियों की ओर से आठ महीने में परियोजना शुरू करने की दिशा में कार्रवाई का लिखित आश्वासन मिलने के बाद किसानों ने धरना समाप्त कर दिया।

अब समयसीमा में काम शुरू होने का इंतजार
आंदोलन समाप्त होने के बाद अब क्षेत्र के किसानों की निगाहें परियोजना की प्रगति पर टिकी हैं। किसानों को उम्मीद है कि तय समयसीमा में प्रक्रिया पूरी कर निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा। परियोजना पूरी होने पर केसला क्षेत्र के करीब 35 गांवों की 10 से 12 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा मिलने की उम्मीद है।

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