लखनऊ के गीता पल्ली क्षेत्र में मायावती सरकार के कार्यकाल के दौरान सड़क किनारे पीपल और अन्य प्रजातियों के पौधे लगाए गए थे। पौधों को पशुओं और अन्य नुकसान से बचाने के लिए उनके चारों ओर लोहे की सुरक्षा रेलिंग लगाई गई थी। वर्षों के दौरान ये पौधे बड़े होकर विशाल पेड़ों का रूप ले चुके हैं, लेकिन कई स्थानों पर उनकी सुरक्षा के लिए लगाई गई लोहे की रेलिंग अब भी नहीं हटाई गई है। परिणामस्वरूप पेड़ों के तने और शाखाएं बढ़ते-बढ़ते रेलिंग के भीतर समा गई हैं और कई जगह लोहे की जालियां पेड़ों के अंदर तक धंस चुकी हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि समय रहते इन रेलिंगों को हटाया जाना चाहिए था। अब स्थिति यह है कि लोहे की संरचनाएं पेड़ों के प्राकृतिक विकास में बाधा बन रही हैं और उनकी बढ़त प्रभावित हो सकती है। पर्यावरण प्रेमियों का मानना है कि पेड़ों की नियमित निगरानी और रखरखाव भी वृक्षारोपण जितना ही आवश्यक है। उन्होंने संबंधित विभागों से मांग की है कि ऐसे सभी स्थानों का सर्वे कर पेड़ों में धंसी पुरानी रेलिंगों को सावधानीपूर्वक हटाया जाए, ताकि पेड़ों का विकास बिना किसी अवरोध के हो सके और उन्हें दीर्घकालिक नुकसान से बचाया जा सके।