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तुम-आप

Skand Shukla

Mere Alfaz
                                    
                     
                                                  ‘तुम’ से ‘आप’ पर चले जाना;
यानी, कितना बदल जाना।

प्रीति, साहचर्य, सानिंद्ध्य;
‘तुम’ में, एक निश्छल भावना।

लिहाज़, दूरी, अदब, अंतर;
‘आप’ में है विलगाना।

जीवन में, विरल ही होता,
‘तुम’ सदृश सम्बन्धों का बन पाना;
बन गये जो, सहेज वे रखना,
न उन्हें 'आप' होने देना ।

स्कन्द शुक्ला
 
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4 वर्ष पहले
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