ख़ुमार साहब महान शायर और गीतकार मजरूह सुलतानपुरी आपके अज़ीज़ दोस्त थे। आपका अंदाजे बयां भी औरों से अलग था जो इनकी ख़ूबसूरत ग़ज़लों में और भी चार-चाँद लगाता था।
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