पाकिस्तान और अफगान तालिबान के बीच इस्तांबुल में चल रही शांति वार्ता विफल हो गई है. पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने पुष्टि करते हुए कहा कि बिना किसी सफलता के बातचीत समाप्त हो गई है. पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने बताया कि सीमा पर दोनों देशों के बीच झड़प रोकने के लिए चल रही शांति वार्ता टूट गई है। हालांकि अफगानिस्तान की तरफ से जब तक हमला नहीं किया जाता, तब तक युद्धविराम कायम रहेगा। सीएनएन-न्यूज18 ने सूत्रों के हवाले से बताया कि ख्वाजा आसिफ ने कहा है कि तालिबान शासन सीमा पार आतंकवाद को रोकने के लिए लिखित गारंटी नहीं दे रहा है और साथ ही इस प्रक्रिया में शामिल मध्यस्थ भी अब गतिरोध से तंग आ गए हैं. आसिफ ने कहा, "इस्तांबुल में वार्ता विफल रही है." उन्होंने आगे कहा कि उन्हें विश्वास नहीं है कि मध्यस्थता का एक और दौर जल्द ही होगा.ख्वाजा आसिफ ने तालिबान पर क्षेत्र में आतंकवाद से निपटने के प्रति गंभीर न होने का आरोप लगाया और जोर देकर कहा कि इस्लामाबाद अपने लोगों और संप्रभुता की सुरक्षा के लिए सभी आवश्यक विकल्पों का प्रयोग जारी रखेगा.
बता दें कि ये विफल वार्ता पाकिस्तान-अफ़ग़ानिस्तान सीमा पर बढ़ते तनाव के बीच हुई है.इस हफ़्ते की शुरुआत में पाकिस्तान और अफ़ग़ान सेनाओं के बीच चमन सीमा के पास गोलीबारी हुई, जिससे अस्थायी युद्धविराम टूट गया. उस दौरान दोनों पक्षों के अधिकारी शांति वार्ता के लिए इस्तांबुल में थे. न्यूज एजेंसी एएफपी की रिपोर्ट के मुताबिक अफ़ग़ान सैन्य सूत्रों ने दावा किया है कि पाकिस्तान ने हल्के और भारी हथियारों का इस्तेमाल किया और नागरिक क्षेत्रों को निशाना बनाया है. अफ़ग़ान बलों ने कथित तौर पर चल रही बातचीत के सम्मान में गोलीबारी की. वहीं दूसरी ओर इस्लामाबाद ने आरोपों का खंडन करते हुए जोर देकर कहा कि गोलीबारी अफ़ग़ानिस्तान की ओर से शुरू की गई थी और पाकिस्तानी बलों ने संयमी और जिम्मेदाराना तरीके से जवाब दिया.पाकिस्तान के सूचना मंत्रालय ने एक्स पर एक पोस्ट कर कहा कि हम चमन में पाक-अफगान सीमा पर आज की घटना के संबंध में अफगान पक्ष द्वारा प्रसारित दावों को दृढ़ता से खारिज करते हैं.इसके बाद तालिबान ने पाकिस्तान पर आर्थिक युद्ध छेड़ने का भी आरोप लगाया। काबुल का कहना है कि तोर्खम और स्पिन बोल्डक जैसे व्यापारिक मार्गों को बार-बार बंद कर पाकिस्तान अफगान अर्थव्यवस्था पर दबाव बना रहा है। जिससे आम लोगों को भारी नुकसान होता है। एक अफगान वार्ताकार ने कहा, “हर बार जब पाकिस्तान दबाव डालना चाहता है, वह सीमाएं बंद कर देता है।
वे जानते हैं कि अफगानिस्तान लैंडलॉक्ड है और यह जानबूझकर की गई बदमाशी है।”वहीं, बैठक के नाकाम होने से मध्यस्थ कतर और तुर्की, दोनों पक्षों से नाराज बताए जा रहे हैं। पाकिस्तानी मीडिया में लीक किए गये खबरों में कहा गया है कि कतर, तालिबान का पक्ष ले रहा था। जिसके बारे में कुछ अधिकारियों का मानना है कि "वार्ता से पहले ही पाकिस्तान ने मध्यस्थों पर ही दोष मढ़ दिया था।" कतर ने इस आरोप का सार्वजनिक रूप से जवाब नहीं दिया है। इस बीच, तुर्की के अधिकारियों ने भी इस पर कोई टिप्पणी करने से परहेज किया है, लेकिन अफगान अधिकारी तुर्की के रवैये और उसकी तटस्थता पर सवाल उठा रहे हैं।हिंसा 9 अक्टूबर को काबुल में हुए एक विस्फोट और उसी दिन पक्तिका में हुए एक अन्य विस्फोट के बाद शुरू हुई, जिसके लिए अफगान सरकार ने पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराया। पाकिस्तानी अधिकारियों ने न तो विस्फोटों में अपनी संलिप्तता की पुष्टि की है और न ही इनकार किया है, और न ही किसी भी पक्ष ने शुरुआती घटनाओं में हताहतों की संख्या का विवरण जारी किया है।