अमरनाथ यात्रा का आगाज हो चुका है श्रद्धालुओं में उत्साह है लोग जम्मू से रवाना हुए है इतना ही नहीं यात्रा को लेकर सुरक्षा काफी टाइट है। 'अमरनाथ यात्रा' के तीर्थयात्रियों का पहला जत्था बुधवार (2 जुलाई) को जम्मू से रवाना हुआ। 'हर-हर महादेव' और "बम बम भोले' के जयकारे लगाते हुए श्रद्धालु रवाना हुए। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने यात्रा को हरी झंडी दिखाई। 38 दिन यानी 9 अगस्त तक चलने वाली यात्रा पहलगाम और बालटाल रूट से होकर जाएगी। "जम्मू-कश्मीर सरकार' ने यात्रा मार्ग को 'नो फ्लाइंग जोन' (No Flying Zone) घोषित किया है। अमरनाथ यात्रा के दोनों रास्तों पर सभी हवाई उपकरण-ड्रोन, यूएवी और गुब्बारे प्रतिबंधित रहेंगे। अमरनाथ यात्रा के लिए 3.5 लाख श्रद्धालु रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं। जिन श्रद्धालुओं ने अभी तक ऑनलाइन पंजीकरण नहीं कराया है, उनके लिए जम्मू में सरस्वती धाम, वैष्णवी धाम, पंचायत भवन और महाजन सभा में सेंटर खोले गए हैं। ये सेंटर रोज दो हजार श्रद्धालुओं का रजिस्ट्रेशन कर रहे हैं।
जम्मू-कश्मीर भाजपा अध्यक्ष सत शर्मा ने कहा कि हजारों श्रद्धालु बाबा अमरनाथ के दर्शन के लिए जा रहे हैं। अभी दो महीने पहले एक अलग माहौल बना था, लेकिन आज हम देख सकते हैं कि कैसे श्रद्धालु बाबा भोले के नारे लगा रहे हैं। लोगों को विश्वास है कि वे सुरक्षित हाथों में हैं। आधिकारिक तौर पर यात्रा की शुरुआत 3 जुलाई से होगी। यात्रा 9 अगस्त तक चलेगी। भगवान शिव की पवित्र गुफा तक पहुंचने के लिए दो प्रमुख रास्ते हैं। पहला पहलगाम रूट है। इस रास्ते से गुफा तक पहुंचने में लगभग तीन दिन लगते हैं। यात्रा की शुरुआत पहलगाम से होती है। पहला पड़ाव चंदनवाड़ी है। यहां से चढ़ाई शुरू होती है। 3 किलोमीटर की चढ़ाई के बाद यात्री पिस्सू टॉप पहुंचते हैं। फिर यहां से 9 किमी चलने के बाद शेषनाग पहुंचते हैं। फिर 14 किमी का सफर करने के बाद यात्री पंचतरणी जाते हैं। पंचतरणी से गुफा सिर्फ 6 किमी रह जाती है। बालटाल से दूसरा रास्ता शुरू होता है। यह मार्ग अपेक्षाकृत छोटा है। एकदम खड़ी चढ़ाई है।