नूरपुर के प्राचीन किला के मैदान में स्थित भगवान श्री बृजराज स्वामी का मंदिर क्षेत्रवासियों के साथ संपूर्ण भारत का प्रमुख आस्था का केंद्र है। यह विश्व का एकमात्र ऐसा मंदिर है, जहां भगवान श्रीकृष्ण के साथ राधा नहीं, बल्कि मीरा बाई की मूर्ति स्थापित है। यह दोनों प्रतिमाएं ऐसी लगती हैं मानों आपके सामने साक्षात भगवान श्रीकृष्ण व मीरा बाई खड़े हों। बताते चलें कि इस मंदिर के इतिहास के साथ एक रोचक कथा जुड़ी हुई है। सन 1629 जब नूरपुर के राजा जगत सिंह अपने राज पुरोहित के साथ चितौड़गढ़ के राजा के निमंत्रण पर वहां गए। राजा जगत सिंह व उनके पुरोहित को रात्रि विश्राम के लिए जो महल दिया, उसके बगल में एक मंदिर था, जहां रात के समय राजा को उस मंदिर से घुंघरूओं तथा संगीत की आवाजें सुनाई देती थीं। राजा ने जब मंदिर में बाहर से झांक कर देखा तो एक औरत कमरे में श्रीकृष्ण की मूर्ति के सामने भजन गाते हुए नाच रही थी। राजा ने सारी बात राज पुरोहित को सुनाई। पुरोहित ने भी वापसी पर राजा से इन मूर्तियों को उपहार स्वरूप मांग लेने का सुझाव दिया, क्योंकि श्रीकृष्ण व मीरा की यह मूर्तियां साक्षात हैं। जगत सिंह ने पुरोहित के बताए अनुसार वैसा ही किया। चितौड़गढ़ के राजा ने भी खुशी-खुशी मूर्तियां व मौलश्री का पेड़ राजा जगत सिंह को उपहार स्वरूप दे दिया। उसके बाद नूरपुर के राजा ने अपने दरबार-ए-खास को मंदिर का रूप देकर इन मूर्तियों को वहां पर स्थापित कर दिया। राजस्थानी शैली की काले संगमरमर से बनी श्रीकृष्ण व अष्टधातु से बनी मीरा की मूर्ति आज भी नूरपुर के इस ऐतिहासिक श्री बृजराज स्वामी मंदिर में शोभायमान है। मंदिर की भित्तिकाओं पर कृष्ण लीलाओं का चित्रण दर्शनीय है।