हरोली क्षेत्र के तहत गांव सिंगा में प्रस्तावित स्टोन क्रशर को लेकर विवाद गहरा गया है। क्रशर लगाने के विरोध में ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों ने मोर्चा खोलते हुए पुलिस अधीक्षक और जिलाधीश से मुलाकात कर शिकायत सौंपी। ग्रामीणों ने क्रशर लगाने के लिए जारी एनओसी की वैधता पर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करवाने और क्रशर की स्थापना व संचालन पर रोक लगाने की मांग की है। पंचायत प्रतिनिधियों का आरोप है कि क्रशर के लिए प्रस्तुत एनओसी पर पूर्व पंचायत प्रधान के फर्जी हस्ताक्षर किए गए हैं। पूर्व प्रधान गुरुदेव ने हस्ताक्षरों को अपना मानने से इन्कार किया है। ऐसे में ग्रामीणों ने मामले की जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग उठाई है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में घनी आबादी और कृषि योग्य भूमि के नजदीक क्रशर स्थापित होने से लोगों के स्वास्थ्य, पर्यावरण और खेतीबाड़ी पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। क्रशर से उड़ने वाली धूल और संभावित प्रदूषण के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा कृषि गतिविधियों और पशुपालन पर भी असर पडऩे की आशंका है। ग्रामीणों ने प्रशासन से आग्रह किया कि किसी भी प्रकार की अनुमति या दस्तावेजों की वैधता सुनिश्चित किए बिना क्रशर को स्थापित करने अथवा संचालित करने की अनुमति न दी जाए। भाजपा नेता धर्मेंद्र राणा और पंचायत प्रधान की मौजूदगी में ग्रामीणों ने अधिकारियों के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए कहा कि क्रशर के लिए जारी एनओसी की जांच जरूरी है। इस अवसर पर संजीव कुमार, मोहन लाल, बलवीर सिंह, मोहन लाल, बिंद्र कुमार, तिलक राज, परमजीत सिंह सहित अन्य उपस्थित रहे।