गगरेट विधानसभा क्षेत्र के कैलाश नगर नकड़ोह और गोंदपुर बनेहड़ा लोअर गांवों में लगी भीषण आग ने न केवल किसानों की मेहनत को राख में बदल दिया, बल्कि प्रशासनिक उदासीनता और राजनीतिक संवेदनहीनता की पोल भी खोल दी। इस आगजनी की घटना में लगभग 300 कनाल गेहूं की खड़ी फसल जलकर राख हो गई, जिससे दर्जनों किसान बर्बादी के कगार पर पहुंच गए। इस त्रासदी के बाद जब प्रशासन और स्थानीय विधायक मौके से नदारद रहे, तो पीड़ितों का हाल जानने और उनका दुःख साझा करने पूर्व विधायक चैतन्य शर्मा मौके पर पहुंचे।चैतन्य शर्मा ने किसानों को ढांढस बंधाते हुए कहा कि संकट की इस घड़ी में शासन और प्रशासन की चुप्पी दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है। उन्होंने तीखे शब्दों में कहा कि जब क्षेत्र का किसान बर्बादी का सामना कर रहा था, तब क्षेत्रीय विधायक और प्रशासन के अफसर शिव वाड़ी मेले की पर्चीयाँ काटने में व्यस्त थे। उन्होंने कहा कि बेहतर होगा कि मेले में नाच गाने पर पैसा लुटाने की जगह वो पैसा पीड़ित किसानों को बाँट दिया जाये।यह स्थिति यह दर्शाती है कि गगरेट जैसे सीमावर्ती क्षेत्र की समस्याएं सरकार की प्राथमिकता में कहीं नहीं हैं।चैतन्य शर्मा ने बताया कि घटना के समय बिजली गुल थी और किसानों द्वारा बार-बार कॉल करने के बावजूद समय पर बिजली बहाल नहीं हो सकी। जब देर से बिजली आई, तो ट्यूबवेल चलाकर खेतों में पानी डालकर आग बुझाने का प्रयास किया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी और भारी नुकसान हो चुका था। पूर्व विधायक ने अपने कार्यकाल की याद दिलाते हुए कहा कि उन्होंने गगरेट में फायर ब्रिगेड कार्यालय की स्थापना की प्रक्रिया शुरू कर दी थी, लेकिन मौजूदा कांग्रेस सरकार की लापरवाही के चलते ढाई वर्ष बीत जाने के बावजूद यह कार्यालय आज तक शुरू नहीं हो सका। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि गगरेट में फायर ब्रिगेड की सुविधा होती, तो अंब से गाड़ी बुलाने में लगने वाले अमूल्य समय को बचाया जा सकता था और किसानों की फसलें जलने से रोकी जा सकती थीं। उन्होंने यह भी बताया कि इससे पहले हरवाल और कुनेरन गांवों में भी 35 कनाल गेहूं की फसल आग की भेंट चढ़ चुकी है, जिसमें किसानों ने बिजली के ट्रांसफार्मरों को आग लगने की वजह बताया था, लेकिन दुर्भाग्यवश प्रशासन ने उन मामलों में भी कोई सबक नहीं लिया और आज फिर वही लापरवाही दोहराई गई। पूर्व विधायक ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि गगरेट में जल्द से जल्द फायर ब्रिगेड कार्यालय शुरू नहीं किया गया और प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा नहीं दिया गया, तो भारतीय जनता पार्टी सड़कों पर उतरकर प्रदेश सरकार की नींद तोड़ने का काम करेगी। उन्होंने कहा कि यह केवल प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि सरकार की नाकामी और संवेदनहीनता का ज्वलंत उदाहरण है, जिसे अब क्षेत्र की जनता और भाजपा बर्दाश्त नहीं करेगी।