दशहरे की तैयारियों के बीच सोलन में हिंदू-मुस्लिम भाईचारे और सांप्रदायिक सौहार्द की एक खूबसूरत तस्वीर देखने को मिल रही है। यहां उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से आए मुस्लिम कारीगर रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतले बनाने में जुटे हैं। अपने हुनर और मेहनत से ये कारीगर दशहरे की रौनक बढ़ाने के साथ आपसी प्रेम और सद्भाव का संदेश भी दे रहे हैं। सोलन में दशहरे को लेकर लोगों में खासा उत्साह है। खासकर बच्चे विशाल पुतलों को देखने के लिए उत्सुक हैं। कारीगर तिनका-तिनका जोड़कर पुतलों को अंतिम रूप देने में लगे हुए हैं, ताकि दशहरे के अवसर पर इन्हें आकर्षक रूप में प्रस्तुत किया जा सके। सहारनपुर से आए कारीगर शाहनवाज ने बताया कि हिंदुओं के त्योहार के लिए रावण के पुतले तैयार करके उन्हें बहुत खुशी होती है। उनका प्रयास रहता है कि वे अपने हुनर से बेहतर काम करें और त्योहार की तैयारियों में अपना योगदान दें। शाहनवाज के अनुसार, त्योहार लोगों को एक-दूसरे के करीब लाते हैं और आपसी रिश्तों को मजबूत करते हैं। उन्होंने कहा कि सभी धर्मों के लोगों को एक-दूसरे के त्योहारों का सम्मान करना चाहिए। यही भावना समाज में प्रेम, विश्वास और एकता को मजबूत बनाती है। सोलन में पुतले बनाने में जुटे इन कारीगरों की मेहनत केवल दशहरे की तैयारियों तक सीमित नहीं है। उनकी यह पहल साझा सांस्कृतिक विरासत और आपसी सद्भाव की मिसाल भी पेश करती है। धर्म और आस्थाएं अलग हो सकती हैं, लेकिन त्योहारों की खुशियां लोगों को जोड़ती हैं। सोलन में रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतले तैयार कर रहे ये कारीगर अपने काम के जरिए यही संदेश दे रहे हैं कि आपसी सम्मान, प्रेम और भाईचारा समाज की असली ताकत है।