प्रदेश सरकार की योजनाओं के लाभार्थी गुलाम रसूल गांव खैरी, डाकघर त्रिलोकपुर और तहसील नाहन कृषि व पशुपालन व्यवसाय से जुड़े थे। इस व्यवसाय से उनकी आमदनी इतनी अच्छी नहीं थी कि वह परिवार का बेहतर पोषण कर सके। उन्हें जानकारी मिली कि प्रदेश सरकार की ओर से स्वरोजगार के लिए ऋण सुविधा के साथ उपदान भी मिल रहा है। इसके लिए उन्होंने सहायक निदेशक मत्स्य पालन विभाग नाहन से संपर्क किया। उन्होंने वर्ष 2023 में मछली पालन के लिए तीन लाख की परियोजना स्वीकृत करवाई जिस पर उन्हें 30 प्रतिशत अनुदान भी मिला। इससे उन्होंने चार तालाबों का निर्माण किया तथा जिला सोलन के नालागढ़ से पंगास तथा राहु प्रजाति के मछली के बीज क्रय किए। वर्ष 2023 से अब तक उन्हें मछली पालन से 6 लाख 50 हजार रुपये की आय अर्जित हुई, जिससे उन्हें 4 लाख 50 हजार का शुद्ध लाभ हुआ। इस कार्य के लिए उन्होंने 2 लोगों को रोजगार भी दिया है वह अपने तालाबों से ही मछली विक्रय करते हैं जिसके लिए चंडीगढ़ तथा उत्तर प्रदेश के व्यापारी आकर खरीदते हैं। वह 70 रुपये से 100 रुपये प्रति किलो के हिसाब से मछली विक्रय कर रहे हैं। गुलाम रसूल ने मछली पालन व्यवसाय से प्रेरित होकर पशुपालन विभाग से वर्ष 2024 में बकरी पालन के लिए 60 लाख रुपये की परियोजना स्वीकृत करवाई। जिसमें 30 लाख ऋण तथा 30 लाख अनुदान मिला। उन्होंने इसके लिए दो शेड तथा एक चारा भंडारण का निर्माण करवाया। आज 1 वर्ष के भीतर उनके पास 450 बकरियां हैं, जिनका वह आगामी वर्ष से विक्रय करना आरंभ करेंगे। इस कार्य में उन्होंने पांच लोगों को रोजगार भी दिया है। गुलाम रसूल का 1,000 बकरियां तैयार करने का लक्ष्य है। इसके अतिरिक्त वह आसपास के 500 परिवार को इस व्यवसाय से जुड़ने के लिए प्रेरित करने के लिए प्रयासरत हैं।