मौसम खुलते ही नाचन और सराज क्षेत्र के हजारों किसानों ने बरसाती मटर की बिजाई शुरू कर दी है। बारिश थमने के बाद किसान खेतों में जुट गए हैं। इन दिनों खेत तैयार करने से लेकर मटर की बिजाई तक का काम तेजी से चल रहा है। नाचन और सराज में करीब 30 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में मटर की खेती की जाती है। क्षेत्र की ऊंचाई और जलवायु मटर की फसल के लिए अनुकूल होने के कारण यहां उत्पादित मटर की बाहरी राज्यों में भी अच्छी मांग रहती है। हर साल बरसाती मटर की फसल दिवाली के आसपास तैयार होकर बाजार में पहुंचना शुरू होती है। इस दौरान पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और जम्मू की मंडियों में स्थानीय मटर की मांग बढ़ जाती है। किसानों के अनुसार सीजन के दौरान मटर के अच्छे दाम मिलने से यह फसल उनकी नकदी आमदनी का महत्वपूर्ण जरिया बनती है। क्षेत्र से हर साल करीब 200 से 300 टन से अधिक मटर बाहरी राज्यों की मंडियों में पहुंचने की बात कही गई है। दिवाली के आसपास बाजार में फसल पहुंचने से किसानों को बेहतर कीमत मिलने की उम्मीद रहती है। नाचन क्षेत्र के किलिंग, छम्यार, बाढ़ू, रोहांडा, घीड़ी, चौकी, पंडार, कुटाहची, सरोआ, फंग्यार, कोट, नौण, चैलचौक, मोवीसेरी, स्यांज, शाला, तुना, जहल और धंग्यारा समेत कई क्षेत्रों में किसान मटर की खेती करते हैं। वहीं सराज क्षेत्र के सलाहर, खार्शी, काढ़ा, बगस्याड, थुनाग, जंजैहली, भाटकीधार और बागचनोगी सहित कई पंचायतों में भी बड़े पैमाने पर मटर की बिजाई की जाती है। बरसाती मटर की सबसे बड़ी खासियत इसका समय पर बाजार में पहुंचना है। फसल दिवाली के आसपास तैयार होने से उस दौरान मांग बढ़ने की संभावना रहती है। किसान इसे कम समय में तैयार होने वाली नकदी फसल मानते हैं। यही वजह है कि मौसम खुलते ही किसानों ने खेतों का रुख कर लिया है। किसान हेम सिंह, नंद लाल, वेद प्रकाश, लेख राज, डोले राम, ख्याली राम, प्रेम सिंह, नाग राज, मनोज कुमार और हंस राज ने बताया कि उन्होंने मटर की बिजाई शुरू कर दी है। किसानों को उम्मीद है कि मौसम अनुकूल रहा तो इस बार भी अच्छी पैदावार होगी और बाजार में बेहतर दाम मिलेंगे। कृषि विषय वाद विशेषज्ञ गोहर डॉ. गगन प्रदीप ने क्षेत्र में मटर की बिजाई शुरू होने की पुष्टि की है। उन्होंने किसानों को सलाह दी है कि मटर की बिजाई के लिए प्रमाणित बीज का ही इस्तेमाल करें। इससे फसल की गुणवत्ता और उत्पादन बेहतर बनाए रखने में मदद मिलेगी।