जंजैहली घाटी की सुरक्षा की कार बांधने 11 साल बाद क्षेत्र के आराध्य देवता बायला नारायण चार बड़ की फेरी को लाव लश्कर के साथ निकले। हार के घरद्वार पहुंचने पर देवता बायला नारायण और सहयोगी देवताओं का जगह-जगह लोगों ने भव्य स्वागत किया। इस दौरान जहां देवता के संग देवलू नाटियों पर जमकर झूमे। वहीं, देवताओं के पारंपरिक वाद्य यंत्रों की मधुर ध्वनि से जंजैहली घाटी देवमयी हो गई है। देव बायला नारायण जंजैहली घाटी के आराध्य देवता है और आजकल देवता अपनी तीन पंचायतों के हार द्वार में रक्षा कार बांधने निकले हुए हैं। देव बायला नारायण के साथ देवी गुसैन, देव गरीझनू, देव भरमक्ष व देव गढ़वालू भी परिक्रमा में साथ दे रहे हैं। देवता के पुजारी पवन शर्मा ने बताया कि आगामी सोमवार को देवता की परिक्रमा का अंतिम दिन है। उन्होंने कहा कि देवता का जगह-जगह भव्य स्वागत किया जा रहा है।