अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव के दौरान देवभूमि कुल्लू में आस्था, श्रद्धा और देव परंपराओं का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। बुधवार सुबह से ही जिले के विभिन्न क्षेत्रों से देवी-देवता भगवान रघुनाथ जी के दर्शन के लिए सुल्तानपुर स्थित मंदिर पहुंचने लगे। यहां देवी-देवताओं ने बारी-बारी भगवान रघुनाथ जी के समक्ष शीश नवाया और आशीर्वाद लिया। इस दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की आस्था और उत्साह देखते ही बन रहा था। निरमंड, आनी, बंजार, सैंज, गड़सा, मणिकर्ण, खराहल, ऊझी घाटी और लगघाटी सहित जिले के अलग-अलग क्षेत्रों से देवी-देवता अपने देवलुओं और हारियानों के साथ सुल्तानपुर पहुंचे। पारंपरिक वाद्ययंत्रों, रीति-रिवाजों और देव परंपराओं के बीच भगवान रघुनाथ जी से देवी-देवताओं के मिलन का क्रम चलता रहा। अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव में भगवान रघुनाथ जी से देवी-देवताओं का मिलन विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व रखता है। यह परंपरा कुल्लू की समृद्ध देव संस्कृति और लोगों की गहरी आस्था का प्रतीक है। उत्सव के दौरान विभिन्न क्षेत्रों के देवी-देवताओं का एकत्रित होना यहां की विशिष्ट धार्मिक परंपराओं को दर्शाता है। देव मिलन की इस परंपरा के बीच कुल्लू में दशहरा उत्सव की रौनक और बढ़ गई है। देवी-देवताओं के दर्शन के लिए श्रद्धालु भी पहुंच रहे हैं, जिससे क्षेत्र में भक्तिमय माहौल बना हुआ है। पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ निभाई जा रही यह परंपरा कुल्लू दशहरा को विशिष्ट पहचान प्रदान करती है।