श्रावण अष्टमी मेलों के बाद श्री नयना देवी जी में धार्मिक पर्यटन से जुड़ा कारोबार श्रद्धालुओं की आवक पर निर्भर हो गया है। सप्ताह के अन्य दिनों में अपेक्षाकृत कम श्रद्धालु पहुंचने से मंदिर के आसपास के बाजारों में कारोबार सुस्त रहता है। वहीं रविवार और अन्य छुट्टियों के दिन श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने से दुकानदारों, ढाबा संचालकों, प्रसाद विक्रेताओं और अन्य कारोबारियों के चेहरे खिल उठते हैं। रविवार को श्री नयना देवी जी मंदिर में करीब 20 हजार श्रद्धालुओं ने माता के दर्शन किए। सुबह से ही पंजाब, हिमाचल, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और बिहार से श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। दोपहर की आरती के बाद मंदिर में भीड़ और बढ़ गई। दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की कतार फ्लाईओवर तक पहुंच गई। श्रद्धालुओं को कतारबद्ध तरीके से मंदिर में प्रवेश करवाया गया। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या का असर मंदिर परिसर के साथ-साथ आसपास के बाजार पर भी दिखाई दिया। प्रसाद, माता की चुनरी, धार्मिक सामग्री और खाने-पीने की दुकानों पर दिनभर चहल-पहल बनी रही। दुकानदारों के अनुसार सामान्य दिनों में उनका कारोबार काफी हद तक श्रद्धालुओं की संख्या पर निर्भर करता है। रविवार को अन्य दिनों की अपेक्षा अधिक लोग पहुंचते हैं, जिससे बिक्री में भी बढ़ोतरी हो जाती है। स्थानीय कारोबारियों का कहना है कि श्रावण अष्टमी मेलों के दौरान दोनों धार्मिक स्थलों में लगातार श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है। मेले समाप्त होने के बाद सामान्य दिनों में श्रद्धालुओं की संख्या काफी कम हो जाती है। सोमवार से शनिवार तक स्थानीय लोगों और आसपास के क्षेत्रों से आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या सीमित रहती है। ऐसे में मंदिर के आसपास कारोबार करने वाले दुकानदारों को रविवार और अन्य छुट्टियों का इंतजार रहता है। मंदिर के प्रवेश और निकासी द्वार पर पंजाब की समाजसेवी संस्थाओं की ओर से श्रद्धालुओं के लिए ठंडे पानी की व्यवस्था भी की गई थी। लंबी कतारों में अपनी बारी का इंतजार कर रहे श्रद्धालुओं ने पानी पीकर राहत महसूस की। भीड़ के बावजूद मंदिर परिसर में दिनभर व्यवस्था बनाए रखने पर ध्यान दिया गया। पंजाब से पहुंचे श्रद्धालु मिथुन जैन ने बताया कि रविवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए पहुंचे। भीड़ के बावजूद दर्शन की व्यवस्था ठीक रही। मंदिर के पुजारी लकी शर्मा ने बताया कि रविवार को श्रद्धालुओं की संख्या अधिक रही। श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए मंदिर में व्यवस्था बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया गया।