जिले में मंगलवार रात हुई तेज बारिश ने धान खरीद व्यवस्था की तैयारियों की पोल खोल दी। व्यासपुर, सरस्वतीनगर, प्रतापनगर, छछरौली समेत क्षेत्रों में हुई बारिश से मंडियों में खुले में पड़ा करीब 40 हजार मीट्रिक टन धान भीग गया। उठान में देरी के कारण बड़ी मात्रा में खरीदा जा चुका और खरीद के इंतजार में पड़ा धान फड़ों व मंडियों की सड़कों पर जमा था। फसल को बारिश से बचाने के लिए पर्याप्त तिरपाल और अन्य इंतजाम नहीं होने से किसानों और आढ़तियों की चिंता बढ़ गई है। जिले की आठ प्रमुख मंडियों और पांच खरीद केंद्रों पर अब तक 72,285 मीट्रिक टन धान पहुंच चुका है। इसमें से 23,610 मीट्रिक टन धान की खरीद हो चुकी है। खरीद के बाद उठान नहीं होने के कारण बड़ी मात्रा में धान अभी मंडियों में ही जमा है। ऐसे में अचानक हुई बारिश ने खरीद और उठान व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मंडियों में कई स्थानों पर धान फड़ों के साथ-साथ सड़कों के किनारे भी रखा हुआ था। बारिश शुरू होने के बाद किसानों और आढ़तियों ने अपने स्तर पर तिरपाल डालकर फसल को बचाने का प्रयास किया, लेकिन खुले में बड़ी मात्रा में रखे धान को पूरी तरह ढक पाना संभव नहीं हो सका। इससे कई जगह धान में नमी बढ़ने की आशंका है। किसानों का कहना है कि खेत से फसल मंडी तक पहुंचाने के बाद भी अगर खुले में रखे धान को बारिश से बचाने के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए जाते तो उनकी महीनों की मेहनत पर पानी फिर सकता है। वहीं, आढ़तियों के सामने भी खरीदे गए धान का समय पर उठान कराने और फसल को सुरक्षित रखने की चुनौती बनी हुई है। बारिश से खेतों में खड़ी और कटी हुई धान की फसल पर भी असर पड़ा है। मौसम विभाग ने जिले में शुक्रवार तक तेज बारिश और हवा चलने का पूर्वानुमान दिया है। ऐसे में मंडियों में खुले में पड़े धान को लेकर किसानों की चिंता और बढ़ गई है। बारिश से खेतों में धान की कटाई प्रभावित बारिश के कारण खेतों में धान की कटाई का काम भी प्रभावित हुआ है। जिन किसानों ने फसल काटकर खेतों में रखी थी, उन्हें भी बारिश से नुकसान की चिंता सताने लगी है। लगातार मौसम खराब रहने से कटाई और मंडी में फसल पहुंचाने का काम प्रभावित होने की आशंका है।