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जींद में फैक्ट्री पर रेड के मामले को दबाने के लिए जीएसटी अफसरों के की थी 60 लाख की डील

Naveen Updated Thu, 19 Mar 2026 07:35 PM IST

जीएसटी अधिकारियों की कथित रिश्वतखोरी के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो ने बड़ी कार्रवाई करते हुए जीएसटी के एक इंस्पेक्टर, एक सुपरिटेंडेंट और एक स्थानीय व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई पांच लाख रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़े जाने के बाद की गई। 12 मार्च को जीएसटी रोहतक की टीम ने राजेश की फैक्ट्री पर छापा मारकर दस्तावेज कब्जे में ले लिए थे। इसके बाद अधिकारियों ने पहले एक करोड़ रुपये का जुर्माना बताकर दबाव बनाया और बाद में 60 लाख रुपये में मामला सेट करने की बात कही। राजेश सैनी के अनुसार 13 मार्च को ही उनसे 20 लाख रुपये वसूल लिए गए। बाद में उन्हें रोहतक कार्यालय बुलाकर कुल 24 लाख रुपये और देने का दबाव बनाया गया। व्यापारी ने पहले विजिलेंस से संपर्क किया फिर सीबीआई से। चंडीगढ़ सीबीआई टीम ने योजना बनाकर एक अधिकारी को ड्राइवर बनाकर साथ भेजा और पूरी बातचीत रिकॉर्ड की। योजना के तहत जब एक स्थानीय व्यक्ति परमानंद पांच लाख रुपए लेने फैक्ट्री पहुंचा तो टीम ने उसे मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद जीएसटी के सुपरिटेंडेंट अनिल और इंस्पेक्टर अखिल को भी गिरफ्तार कर लिया गया। मामले में सुपरिटेंडेंट हंसराज फरार हैं, जिनकी तलाश जारी है। आरोप लगाते हुए कहा कि जीएसटी अधिकारी पहले व्यापारियों पर कार्रवाई का डर बनाते हैं और फिर उसी से राहत दिलाने के नाम पर रिश्वत मांगते हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश का हर तीसरा व्यापारी इस तरह की वसूली से परेशान है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कार्रवाई के बाद उन्हें लगातार धमकियां मिल रही हैं और फंसाने की चेतावनी दी जा रही है, जिसकी जानकारी सीबीआई को दे दी गई है। मैन्युफैक्चरर्स वेलफेयर एसोसिएशन के प्रधान सतीश ढिल्लो ने कहा कि व्यापारी को सरकार का टैक्स जरूर देना चाहिए, लेकिन भ्रष्ट अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई जरूरी है। उन्होंने कहा कि जींद में लगातार हो रही जीएसटी रेड से व्यापारियों में रोष है।

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