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एक ड्रोन साढ़े तीन किलोमीटर क्षेत्र पर रखेगा नजर, पांच सेंसर बताएंगे वायु गुणवत्ता का स्तर

फतेहाबाद। धान की फसल के अवशेष जलाने की घटनाओं पर निगरानी रखने के लिए कृषि विभाग ने डिजिटल निगरानी शुरू कर दी है। इसके तहत ड्रोन के माध्यम से खेतों पर नजर रखी जाएगी और अवशेष जलाने की पुष्टि होने पर किसान के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। फतेहाबाद खंड में वायु गुणवत्ता पर नजर रखने के लिए पांच सेंसर लगाए गए हैं। वहीं, राजस्व विभाग के अनुसार खंड के 47 हदबस्त है, जिसमें 62 गांव शामिल है। फसल अवशेष जलाने वाले किसानों की ड्रोन से ली गई तस्वीरों के आधार पर किसान की रेड एंट्री की जाएगी, जिसके बाद वह न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर अपनी फसल नहीं बेच सकेगा। एक ड्रोन करीब साढ़े तीन किलोमीटर के क्षेत्र में निगरानी करेगा। कृषि विभाग की ओर से दो ड्रोन का प्रशिक्षण भी पूरा कर लिया गया है। इनमें भिरड़ाना और हिजरावां खुर्द क्षेत्र शामिल हैं। ड्रोन के माध्यम से प्रतिदिन दोपहर 12 से 3 बजे के बीच निगरानी की जाएगी। विभाग के अनुसार, अभी तक पराली जलाने से संबंधित कोई लोकेशन सामने नहीं आई है। निगरानी के दौरान यदि किसी खेत में फसल अवशेष जलाने की गतिविधि मिलती है, तो उसकी तस्वीर लेकर आगे की कार्रवाई की जाएगी। -- पांच गांवों में रेड जोन पर विशेष नजर फतेहाबाद खंड में वायु गुणवत्ता का स्तर जानने के लिए पांच सेंसर लगाए गए हैं। इनके माध्यम से वायु गुणवत्ता की निगरानी की जाएगी और किसानों को प्रतिदिन इसके स्तर की जानकारी दी जाएगी। इसके अलावा हिजरावां खुर्द, हिजरावां कलां, भिरड़ाना, बीघड़ और बहबलपुर को रेड जोन के रूप में चिह्नित कर विशेष निगरानी की जाएगी। इन क्षेत्रों में धान के अवशेष जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए विभागीय गतिविधियां तेज की जाएंगी। ---- 47 हदबस्त में 62 गांव शामिल फतेहाबाद खंड में चिह्नित 47 हदबस्त के अंतर्गत कुल 62 गांव आते हैं। इन गांवों में ड्रोन और अन्य डिजिटल माध्यमों से निगरानी कर पराली जलाने की घटनाओं का पता लगाया जाएगा। इसका उद्देश्य किसानों को फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन करने के लिए प्रोत्साहित करना और वायु प्रदूषण को नियंत्रित करना है। डिजिटल निगरानी से घटनाओं की पहचान कर समय पर कार्रवाई करने में मदद मिलेगी। --- ड्रोन प्रशिक्षण के दौरान खंड कृषि अधिकारी डॉ. जयकुमार भौरिया, कृषि पर्यवेक्षक डॉ. कोमल, डॉ. भारत खोखर और कृषि विकास अधिकारी (यंत्र) नीरज कुमार मौजूद रहे। कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे धान के अवशेषों को खेतों में न जलाएं और पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के लिए फसल अवशेष प्रबंधन के उचित तरीकों को अपनाएं। :: फसल अवशेष जलाने से रोकने के लिए किसानों को जागरुक किया गया है। वहीं इस बार डिजिटल निगरानी शुरू की गई है। जिससे फसल अवशेष जलाने की लोकेशन मिलेगी। इसके बाद आगे की कार्यवाही होगी। डॉ. राजपाल, तकनीक सहायक, कृषि विभाग, फतेहाबाद।

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