लंबी कानूनी प्रक्रियाओं से बचाव के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) द्वारा वाद-पूर्व मध्यस्थता (प्री-इंस्टीट्यूशन मिडिएशन) को प्रभावी रूप से लागू किया गया है। इसके तहत पिछले एक साल में 650 मामलों का निस्तारण एफआईआर दर्ज होने से पहले ही आपसी समझौते के माध्यम से कराया गया है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव ऋचा उपाध्याय का कहना है कि यह कदम न्याय प्रणाली पर पड़ने वाले अनावश्यक दबाव को कम करने में सहायक साबित हो रहा है। इस प्रक्रिया के तहत उन मामलों को प्राथमिकता दी जाती है, जो आपसी सहमति से सुलझ सकते हैं। इसमें पारिवारिक विवाद, वाणिज्यिक विवाद, बैंक संबंधी और ट्रैफिक चालान संबंधी विवाद शामिल हैं। पहल के चलते न केवल पुलिस थानों में लंबित मामलों की संख्या घटी है, बल्कि अदालतों में भी केसों का बोझ कम हुआ है। इससे न केवल समय की बचत हो रही है, बल्कि लोगों को भी कानूनी प्रक्रियाओं में होने वाले आर्थिक और मानसिक तनाव से राहत मिल रही है।