सूरजपुर स्थित जिला अदालत में राष्ट्रीय लोक अदालत के दौरान बंदियों द्वारा निर्मित कलाकृतियों की एक विशेष प्रदर्शनी आयोजित की गई। इस प्रदर्शनी में बंदियों और किशोर कैदियों की प्रतिभा और रचनात्मकता को उजागर किया गया। प्रदर्शनी में झालर, दीये, बैग, पेंटिंग, और मूर्तियों सहित कई अनोखी और आकर्षक वस्तुएं प्रदर्शित की गईं। बंदियों द्वारा बनाए गए हस्तशिल्प और कलाकृतियों ने न केवल उनकी मेहनत को दर्शाया, बल्कि समाज के प्रति उनके पुनर्वास और सकारात्मक योगदान की भावना को भी उजागर किया। इस प्रदर्शनी में जेल के किशोर बंदियों द्वारा तैयार किए गए बैग विशेष आकर्षण का केंद्र बने। ने इस अवसर पर कहा कि इस तरह की गतिविधियां बंदियों को आत्मनिर्भर बनाने और उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए बेहद उपयोगी हैं। उन्होंने बताया कि जेल में बंदियों को विभिन्न कौशलों का प्रशिक्षण दिया जाता है ताकि रिहाई के बाद वे समाज में बेहतर जीवन जी सकें। इंडिया वीजन फाउंडेशन के विशाल रावत ने बताया कि लोगों ने बंदियों की कलाकृतियों को सराहा। प्रदर्शनी के जरिए इन वस्तुओं की बिक्री भी की गई, जिससे प्राप्त धनराशि को बंदियों के पुनर्वास और विकास में उपयोग किया जाएगा। यह प्रदर्शनी न केवल बंदियों की छुपी हुई प्रतिभा को सामने लाने का प्रयास है, बल्कि समाज को यह संदेश भी देती है कि पुनर्वास के अवसर मिलने पर हर व्यक्ति जीवन में बदलाव ला सकता है।