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VIDEO : उफनाते चैंबर, घरों में आ रहे गंदे पानी से बीमार हो रहा निठारी, ग्रामीणों ने खुलकर रखी अपनी बातें

देश की आजादी के पहले बसे गांव की पहचान बादशाहों के जमाने में सुठारी के रूप में होती थी। स्वतंत्रता मिलने के करीब 30 साल बाद इसका नाम निठारी पड़ा। ग्रामीणों ने खेत में लहलहाते धान की फसलों और गुलाब की खुशबू से महकते नोएडा को बसते देखा। शहरीकरण के बीच शहर को काफी हद तक विकसित हो गए, लेकिन निठारी गांव आज भी बदहाली के आंसू रो रहा है। यहां पूरे इलाके में चेंबर से उफनाकर सड़कों में भरे सीवर के पानी से लेकर ढंग से सांस लेने तक के लिए पार्क न होने समेत कई मूलभूत समस्याओं से ग्रामीण क्षेत्र त्रस्त हो चुके हैं। सेक्टर 31 स्थित निठारी गांव में अमर उजाला की ओर से अमर उजाला संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान ग्रामीणों ने खुलकर अपनी अपनी बात रखीं। ग्रामीणों ने बताया कि जैसे जैसे समय बढ़ता गया वैसे वैसे जनसंख्या बढ़ने से यहां पुरानी पड़ी सीवर लाइने भी जवाब देने लगीं। पूरे निठारी में सीवर लाइन लीकेज और चेंबर ओवरफ्लो होने से सड़कों पर सीवर का पानी भरा रहता है। ग्रामीणों ने बताया कि निठारी के बारात घर में पार्किंग स्थल न होने से काफी दिक्कत होती है। जहां वाहन खड़ी करने की जगह है, वहां अवैध दुकानें हैं। हाल ही में 25 नवंबर को बारात घर में ही शादी में आए वाहनों की पार्किंग न होने से खड़े वाहनों के पुलिस ने 31 हजार रुके तक का चालान कर दिया। प्राधिकरण से मांग है कि पार्किंग बनाई जाए। अमित कुमार गुप्ता ने बताया कि निठारी में एक भी पार्क नहीं है, जहां बच्चों, बुजुर्गों के शारीरिक स्वास्थ्य के लिए वह टहल घूम या अन्य एक्टिविटी कर सकें। विक्की शर्मा ने बताया कि यहां कानी दूषित आता है और समय पर नहीं आता, हम लोग मिनरल वाटर खरीदकर पीते हैं यहां तक कि मजबूर अन्य कामों के लिए भी प्रयोग करते हैं। जब। साफ पानी आता है तो उसको स्टॉक लगाकर 2 3 दिनों तक रखना पड़ता है। राहुल ने बताया कि यहां लोग लालच में आकर लगातार अपनी अपनी छतों के टावर लगवा रहे हैं। जबकि गांव में टावर लगवाना मना है। वह चाहें तो गांव के बाहर खाली पड़ी जमीन में भी लगवा सकते हैं। गांव में लगे टावरों की रेडिएशन हाइ होने से लोग बीमार हो रहे हैं। यहां सार्वजनिक परिवहन के नाम पर कुछ नहीं हैं। बहुत पहले कभी दिल्ली, नोएडा समेत अन्य जगह जाने के लिए निठारी में बस का स्टॉप रहता था। लेकिन अब वो भी नहीं रहा। राशन कार्ड बनवाने के लिए 3 से 5 हजार तक की डिमांड और ई केवाईसी कराने के नाम पर कोटेदार प्रति व्यक्ति 50 रुपए मांगता है।

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