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Vivah Panchami 2024: विवाह पंचमी कल, सीता राम के पूजन के साथ गौरी पूजन करने से मिलते हैं बहुत लाभ

Thu, 05 Dec 2024 12:53 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Vivah Panchami 2024: विवाह पंचमी की तिथि पर भगवान राम और जनकपुत्री सीता का विवाह हुआ था। इस तिथि पर पूजा- उपासना करने से वैवाहिक जीवन में सामंजस्य, सुख और समृद्धि आती है।
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मार्गशीर्ष मास (अगहन) के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर विवाह पंचमी का पर्व मनाया जाता है - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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Vivah Panchami 2024: हिंदू पंचांग के अनुसार हर वर्ष मार्गशीर्ष मास (अगहन) के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को भगवान श्रीराम और माता सीता के विवाह उत्सव के रूप में मनाया जाता है। यह तिथि विशेष रूप से भगवान राम और माता सीता के भक्तों के लिए पवित्र और मंगलकारी मानी जाती है। विवाह पंचमी एक ऐसा पर्व है जो भक्तों को भक्ति और समर्पण की भावना से जोड़ता है और राम-सीता के दिव्य प्रेम का स्मरण कराता है।

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विवाह पंचमी का महत्व
त्रेतायुग में इस दिन अयोध्या के राजा दशरथ के पुत्र भगवान श्रीराम और मिथिला नरेश जनक की पुत्री माता सीता का विवाह संपन्न हुआ था। यह विवाह मर्यादा, धर्म और कर्तव्य के आदर्शों का प्रतीक है। इस दिन भगवान राम और माता सीता की पूजा करने से वैवाहिक जीवन में सुख और शांति आती है। जो लोग विवाह में बाधा का सामना कर रहे हैं, वे इस दिन पूजा कर लाभ प्राप्त कर सकते हैं। विवाह पंचमी भारतीय परंपरा में आदर्श दांपत्य जीवन की सीख देती है। विवाह पंचमी पर पूजा और उपासना करने से वैवाहिक जीवन में सामंजस्य, सुख और समृद्धि आती है। भगवान राम और माता सीता के आदर्श जीवन से प्रेरणा लेते हुए व्यक्ति अपने जीवन को उन्नति की ओर अग्रसर कर सकता है।

विवाह पंचमी पूजा विधि
विवाह पंचमी के दिन प्रातः काल जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल को अच्छे से साफ करके वहां भगवान राम, माता सीता या राम दरबार को स्थापित करें। पूजा स्थल को फूलों, दीपों और रंगोली से सजाकर विवाह मंडप का प्रतीक बनाएं। भगवान राम और माता सीता की पंचोपचार पूजा से करें, जिसमें चंदन, अक्षत, पुष्प, धूप और दीपक अर्पित किए जाते हैं। इसके बाद रामचरितमानस के विवाह प्रसंग का पाठ करें, जिससे भगवान राम और माता सीता के आदर्श दांपत्य जीवन को स्मरण किया जा सके। पूजा के दौरान श्रीराम और माता सीता के विवाह मंत्रों का जाप करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इस अवसर पर "सीता राम चरित सुनि, पावन, कलुष विचार नाथ हरन" जैसे मंत्रों का जाप किया जा सकता है। पूजा के अंत में भगवान राम और माता सीता को फल, मिठाई और पंचामृत का भोग लगाएं। भोग चढ़ाने के बाद इसे प्रसाद स्वरूप सभी भक्तों में वितरित करें।
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गौरी पूजन से लाभ
रामायण के अनुसार माता जानकी ने भगवान राम को पति रूप में प्राप्त करने के लिए मां गौरी की पूजा की थी, जिसके फलस्वरूप प्रभु राम ने सीता स्वयंवर के दौरान भगवान शिव के धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाकर जनक नंदिनी को अपनी अर्धांगिनी बना लिया था। धर्मशास्त्रों के अनुसार, गौरी पूजा करने से अविवाहित कन्याओं को योग्य वर की प्राप्ति होती है और विवाहित महिलाएं अपने वैवाहिक जीवन को सुखमय बना सकती हैं। गौरी पूजन में माता गौरी का श्रृंगार, सुहाग सामग्री का अर्पण, और उनका ध्यान करना विशेष फलदायी माना गया है। पूजा में "ॐ गौरी शंकराय नमः" मंत्र का जाप करना शुभ होता है।

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