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Shariq Kaifi Shayari: यूं भी आवाज़ को ऊंचा नहीं कर पाए हम

काव्य डेस्क

Urdu Adab
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                            यूं भी आवाज़ को ऊंचा नहीं कर पाए हम
        
                                                    
                            
अपने गुस्से पे भरोसा नहीं कर पाए हम

आ बदन को ही तेरे हाथ लगा कर देखें
आग पत्थर से तो पैदा नहीं कर पाए हम

शक्ल दुनिया की बदलना तो बहुत दूर की बात
एक कमरे को भी कमरा नहीं कर पाए हम

जिसमे हर बात कही जाती है आसानी से
ऐसे हालात ही पैदा नहीं कर पाए हम

कोई सिक्का नही चादर पे तो हैरत क्या है
इक तमाशा कभी पूरा नहीं कर पाए हम

वो भी उन चंद मरीज़ों में है शामिल शारिक
मुस्कुराकर जिन्हें अच्छा नहीं कर पाए हम

साभार: शारिक़ कैफ़ी की फेसबुक वाल से 
एक वर्ष पहले
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