विज्ञापन

शारिक़ कैफ़ी: इक दिन ख़ुद को अपने पास बिठाया हम ने

काव्य डेस्क

Urdu Adab
विज्ञापन
                                    
                     
                                                  इक दिन ख़ुद को अपने पास बिठाया हम ने 
पहले यार बनाया फिर समझाया हम ने 

ख़ुद भी आख़िर-कार उन्ही वा'दों से बहले 
जिन से सारी दुनिया को बहलाया हम ने 

भीड़ ने यूँ ही रहबर मान लिया है वर्ना 
अपने अलावा किस को घर पहुँचाया हम ने 

मौत ने सारी रात हमारी नब्ज़ टटोली 
ऐसा मरने का माहौल बनाया हम ने 

घर से निकले चौक गए फिर पार्क में बैठे 
तन्हाई को जगह जगह बिखराया हम ने 
विज्ञापन

इन लम्हों में किस कि शिरकत कैसी शिरकत 
उसे बुला कर अपना काम बढ़ाया हम ने 

दुनिया के कच्चे रंगों का रोना रोया 
फिर दुनिया पर अपना रंग जमाया हम ने 

जब 'शारिक़' पहचान गए मंज़िल की हक़ीक़त 
फिर रस्ते को रस्ते भर उलझाया हम ने 
5 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Manju Sharma

3563 कविताएं

View Profile