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क़तील शिफ़ाई: तू हमें जब कभी याद आए, पीत की चाँदनी याद आए

काव्य डेस्क

Urdu Adab
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तू हमें जब कभी याद आए


पीत की चाँदनी याद आए

भूलना चाहा एक आश्ना को
सैंकड़ों अजनबी याद आए

प्यार ज़ंजीर-ए-जाँ बन गया है
दर्द की हर कड़ी याद आए

देख आए हैं सब कू-ए-क़ातिल
अब किसे ज़िंदगी याद आए

क्या हुईं जुगनुओं सी वो आँखें
रात बरसात की याद आए

ज़िक्र जब कोई छेड़े चमन का
पंखुड़ी पंखुड़ी याद आए

शाम-ए-ग़ुर्बत का ये घुप अँधेरा
शक्ल वो चाँद सी याद आए

जब करूँ मैं ज़माने का शिकवा
भूल अपनी कोई याद आए

देख कर मूसला-धार बारिश
अपनी तिश्ना-लबी याद आए

ग़म तो बिछड़े हुओं का है लेकिन
इक नया शख़्स भी याद आए

था 'क़तील' आख़री दोस्त अपना
वो भला आदमी याद आए हमारे यूट्यूब चैनल को Subscribe करें।

एक दिन पहले
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