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Hindi Shayari: ख़ुमार बाराबंकवी के चुनिंदा अशआर

काव्य डेस्क

Urdu Adab
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                                                  मोहब्बत को समझना है तो नासेह ख़ुद मोहब्बत कर 
किनारे से कभी अंदाज़ा-ए-तूफ़ाँ नहीं होता 

दुश्मनों से प्यार होता जाएगा 
दोस्तों को आज़माते जाइए 
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दूसरों पर अगर तब्सिरा कीजिए 
सामने आइना रख लिया कीजिए 

हटाए थे जो राह से दोस्तों की 
वो पत्थर मिरे घर में आने लगे हैं 

ये वफ़ा की सख़्त राहें ये तुम्हारे पाँव नाज़ुक 
न लो इंतिक़ाम मुझ से मिरे साथ साथ चल के 

रात बाक़ी थी जब वो बिछड़े थे 
कट गई उम्र रात बाक़ी है 

न हारा है इश्क़ और न दुनिया थकी है 
दिया जल रहा है हवा चल रही है 

कहीं शेर ओ नग़्मा बन के कहीं आँसुओं में ढल के 
वो मुझे मिले तो लेकिन कई सूरतें बदल के 

ख़ुदा बचाए तिरी मस्त मस्त आँखों से 
फ़रिश्ता हो तो बहक जाए आदमी क्या है 

चराग़ों के बदले मकाँ जल रहे हैं 
नया है ज़माना नई रौशनी है 
एक वर्ष पहले
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