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भरोसे पर शायरों के अल्फ़ाज़

काव्य डेस्क

Urdu Adab
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हमें ख़ुदा पे भरोसा है ना-ख़ुदा पे नहीं
ख़ुदा जो देता है वो ना-ख़ुदा नहीं देता
- अख्तर लख़नवी


मुझे छोड़ दे मेरे हाल पर तिरा क्या भरोसा है चारागर
ये तिरी नवाज़िश-ए-मुख़्तसर मेरा दर्द और बढ़ा न दे
- शकील बदायूंनी

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झूट पर उस के भरोसा कर लिया
धूप इतनी थी कि साया कर लिया
- शारिक़ कैफ़ी


कोई भरोसा नहीं अब्र के बरसने का
बढ़ेगी प्यास की शिद्दत न आसमां देखो
- इब्राहीम अश्क 

आइने पर तो है भरोसा मुझे
उस से क्यूं मुंह छुपाए बैठी हूं
- आसिमा ताहिर


इस शहर के लोगों पे भरोसा नहीं करना
ज़ंजीर कोई दर पे लगाओ कि चला मैं
- ख़ालिद मलिक साहिल 

दिल को तिरी चाहत पे भरोसा भी बहुत है
और तुझ से बिछड़ जाने का डर भी नहीं जाता
- अहमद फ़राज़


आदमी बुलबुला है पानी का
क्या भरोसा है ज़िंदगानी का
- मौलवी अब्दुर रज़ा रज़ा

या तेरे अलावा भी किसी शय की तलब है
या अपनी मोहब्बत पे भरोसा नहीं हम को
- शहरयार


हम अक़्ल पे उल्फ़त में भरोसा नहीं करते
जब करते हैं कुछ काम तो सोचा नहीं करते
- मख़मूर जालंधरी

4 वर्ष पहले
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