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आज का शब्द: नायक और अनुज लुगुन की कविता- परदे से गुम हो गई स्त्रियाँ

काव्य डेस्क

Aaj Ka Shabd
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                                                  'हिंदी हैं हम' शब्द श्रृंखला में आज का शब्द है नायक, जिसका अर्थ है- लोगों को अपनी आज्ञा के अनुसार चलाने वाला आदमी, नेता, अगुआ, अधिपति, स्वामी, मालिक। प्रस्तुत है अनुज लुगुन की कविता- परदे से गुम हो गई स्त्रियाँ


मैं परदे से गुम हो गई 
स्त्रियों के बारे में सोच रहा हूँ 
सोच रहा हूँ कि 
क्या उन्हें कोई नायक नहीं मिला 
जो उनको लापता होने से बचा लेता 

मैं बचपन में देखे गए 
उन अभिनेत्रियों को खोज रहा हूँ 
जिनके चेहरे की कथा 
उम्र के दो दशकों में मुझे कहीं नहीं दिख रही 
क्या अभिनेत्रियों की उम्र इतनी कम होती है 

मैंने परियों की कहानी सुनी है 
परियाँ सुंदर होती हैं 
परियाँ जादू करती हैं 
परियाँ अचानक ग़ायब हो जाया करती हैं 
क्या वे सभी अभिनेत्रियाँ 
ग़ायब होने की कला जानती थीं 
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मुझे बताया गया है कि 
कलाएँ आत्मा गढ़ती हैं 
कलाकार उसका मज़दूर होता है 
तो क्या मज़दूरी नहीं मिलने की वजह से 
उन्होंने काम पर आना बंद कर दिया

ऐसी कई स्त्रियाँ हैं 
और कई परदे हैं जो हमारी आँखों में टँगे होते हैं 
घर परदा है 
स्कूल परदा है 
कॉलेज परदा है 
नौकरी परदा है 
इन जगहों में साथ काम करने वाली स्त्रियों को 
मैंने कभी नहीं देखा मेरी तरह कविता लिखते हुए 
अपने मन से कहीं भी चले जाते हुए 
यहाँ तक कि यह कहते हुए भी नहीं सुना कि 
माँ बनने से पहले एक बार तो ताजमहल की यात्रा ज़रूरी है 
पता नहीं वे फिर कभी 
ताजमहल देख पाएँगी भी या नहीं इस राजनीतिक समय में 

मैं परदे से गुम हो गई स्त्रियों के बारे में सोच रहा हूँ 
सोच रहा हूँ कि क्या 
ताजमहल की राजनीति से सदियों पहले 
उनके उम्र को लेकर एक स्वर में राजनीति हो चुकी है? 
3 वर्ष पहले
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