हिंदी हैं हम शब्द-श्रृंखला में आज का शब्द है भारती जिसका अर्थ है 1. सरस्वती नामक देवी 2. वचन ; वाणी 3. एक प्रकार का कुलनाम। कवि जयशंकर प्रसाद ने अपनी कविता में इस शब्द का प्रयोग किया है।
हिमाद्रि तुंग शृंग से प्रबुद्ध शुद्ध भारती
स्वयं प्रभा समुज्ज्वला स्वतंत्रता पुकारती
'अमर्त्य वीर पुत्र हो, दृढ़- प्रतिज्ञ सोच लो,
प्रशस्त पुण्य पंथ है, बढ़े चलो, बढ़े चलो।'
असंख्य कीर्ति-रश्मियां विकीर्ण दिव्य दाह-सी
सपूत मातृभूमि के - रुको न शूर साहसी!
अराति सैन्य सिंधु में, सुबाड़वाग्नि से जलो,
प्रवीर हो जयी बनो - बढ़े चलो, बढ़े चलो।