विज्ञापन

आज का शब्द: अंक और रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’की कविता- पा ही लेंगे प्यार के दो-चार बिन्दु

काव्य डेस्क

Aaj Ka Shabd
विज्ञापन
                                    
                     
                                                  'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- अंक, जिसका अर्थ है- चिह्न, छाप, गोद, संख्या का सूचक चिन्ह, जैसे 1,2,3 आदि। प्रस्तुत है रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’की कविता- पा ही लेंगे प्यार के दो-चार बिन्दु

1
'अंक में ले लो,
थकान सफर की'-
नदिया बोली ।

2
तैर के सिन्धु
पा ही लेंगे प्यार के
दो-चार बिन्दु ।

3
आपका आना
हम सबके साथ
घर विहँसा

4
अम्बर- क्यारी
खरगोश बादल
दुबकें, दौड़ें ।

5
बजे नगाड़े
अम्बर में मेघों के
खुले अखाड़े ।

6
काले बदल
नभ के नयनों में
आँजें काजल।
 
विज्ञापन

7
शम्पा मुस्काए
मेघों के वन में ये
किसे बुलाए !

8
नभ को रौंदें
पागल हाथी बन
धूसर मेघा ।

9
धरती भीगी
घन घट ढो लाए
तरु नहाए।

10
मौर सजाए
इन्द्रधनुष भाल
जलद राजा।

11
जीवन-साँझ
अनुताप क्यों करे
दीप जलाएँ ।

12
सिन्दूरी साँझ
ले मादक मुस्कान
पन्थ निहारे।

13
आकुल नैन
अम्बर पट खिंचे,
गुलाबी डोरे।

14
हो गई साँझ
रिश्ते, नाते व प्यार
हुए फरार ।

15
बन्धन टूटे
बरसों रहे साथी
साँझ में छूटे।

2 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all