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आज का शब्द: आस्तिक और कुमार विकल की कविता- एक नास्तिक के प्रार्थना गीत

काव्य डेस्क

Aaj Ka Shabd
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                                                  'हिंदी हैं हम' शब्द श्रृंखला में आज का शब्द है- आस्तिक, जिसका अर्थ है- ईश्वर तथा परलोक के अस्तित्व में विश्वास करने वाला। प्रस्तुत है कुमार विकल की कविता- एक नास्तिक के प्रार्थना गीत 

ये सभी प्रार्थनायें
भक्ति—गीत
विनय पद
और सभी आस्तिक कविताएँ
एक निहायत निजी ईश्वर को संबोधित हैं
जिसे मैंने दुखी दिनों में
रात गये
एक शराबख़ाने की अकेली बेंच पर
पियक्कड़ी की हालत में
प्रवचन की मुद्रा में पाया था
“ज़िन्दगी से भगे सिद्धार्थ
वापस लौट आओ
ज़िन्दगी अब भी कविता के रूप में
तुम्हारा इंतज़ार कर् रही है”
मैं जानता हूँ कि कविता में आदमी की मुक्ति नहीं
लेकिन जब आदमी
कविता को शराब के अँधेरे से निकालकर
श्रम की रोशनी में लाता है
तब वह आदमी की मुक्ति के नये अर्थ पाता है”
3 वर्ष पहले
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