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अगर दिल अच्छा है, तो बदसूरती भी खूबसूरती बन जाएगी...

काव्य डेस्क

Mud Mud Ke Dekhta Hu
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                                                  मैं बदसूरत पैदा हुआ था। गांव के लोग अक्सर मेरे चेहरे का मजाक उड़ाते थे और स्कूल में धमकाने वाले लड़के तो कभी-कभी मुझे इसके कारण पीट भी देते थे। मैं रोते हुए घर भाग
आता था, जहां मेरी मां कहती थीं, तुम बदसूरत नहीं हो, बेटा। तुम्हारे पास नाक और दो कान हैं। तुम्हारे हाथ-पैर भी सही-सलामत हैं, तो तुम बदसूरत कैसे हो सकते हो? अगर तुम्हारा
दिल अच्छा है और तुम हमेशा सही काम करते हो, तो तुम्हारी बदसूरती भी खूबसूरती बन जाएगी। शिक्षित लोग भी मेरा मजाक उड़ाते थे, लेकिन जब मैं अपनी मां की बातें याद करता
था, तो मुझे राहत मिलती थी। मेरी निरक्षर मां पढ़ने-लिखने वालों का काफी सम्मान करती थीं। हम इतने गरीब थे, कि हमें अक्सर पता नहीं होता था कि अगली बार हमारे लिए खाना
कहां से आएगा, फिर भी उसने मुझे किताबें खरीदने या लेखन करने से मना नहीं किया।


 
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अपना काम भूल जाने के कारण मां नाराज हो गई...

स्वभाव से मेहनती होने के कारण उसे आलसी बच्चे पसंद नहीं थे, फिर भी मैं जब तक किताब में सिर घुसाए रखता, अपने काम छोड़ सकता था। एक बार बाजार में एक किस्सागो आया और मैं उसे सुनने के लिए चुपके से चला गया। अपना काम भूल जाने के कारण मां नाराज हो गई। उस रात जब वह केरोसिन तेल वाली लालटेन की मंद रोशनी में पुराने कपड़ों पर पैबंद लगा रही थी, तो मैं दिन में सुनी कहानी उसे नहीं सुना सकता था। लेकिन उसने कहानी सुनी, उसकी नजर में पेशेवर किस्सागो मृदुभाषी होते हुए भी संदिग्ध पेशे वाले होते हैं। धीरे-धीरे वह उन कहानियों में रुचि लेने लगी और मुझे नई कहानियां सुनने की अनकही मंजूरी मिल गई। मां की दयालुता का बदला चुकाने और अपनी स्मृति के प्रदर्शन के लिए मैं उन कहानियों को अच्छा विस्तार देता था।

-  मो यान, चीन के नोबेलजयी साहित्यकार
 
5 महीने पहले
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