जब मैं मात्र बारह वर्ष का था, तभी मुझे एहसास हुआ कि मैं कलाकार बनना चाहता हूं। यह द्वितीय विश्वयुद्ध के समय हुआ। लेकिन अपने लेखन के पेशेवर विकास के लिए मुझे एक साल इंतजार करना पड़ा, जब हिटलर की युवाओं की एक पत्रिका से मुझे एक आकर्षक प्रस्ताव मिला। उसमें एक कहानी प्रतियोगिता आयोजित की गई थी, जिसमें विजेताओं को पुरस्कार दिया जाता। मैं तुरंत अपना पहला उपन्यास लिखने के लिए तैयार हो गया। अपनी मां की पृष्ठभूमि से प्रभावित होकर मैंने इसका नाम काशुबियन रखा। लेकिन इसकी घटनाएं मौजूदा दर्दनाक वक्त की नहीं थीं, बल्कि तेरहवीं शताब्दी की थी।
कानों में उंगलियां डालकर पढ़ता था...
मुझे जहां तक याद है, काशुबियन के आंतरिक इलाकों की आर्थिक स्थितियों की एक संक्षिप्त रूपरेखा के बाद मैंने प्रतिशोध के साथ लूट और नरसंहार की कहानी लिखनी शुरू की। लेकिन लिखना शुरू करने से पहले मैंने काफी कुछ पढ़ा। पढ़ने का मेरा अपना तरीका था, मैं कानों में उंगलियां डालकर पढ़ता था। यहां मैं स्पष्ट कर दूं कि मेरा और मेरी छोटी बहन की परवरिश कठिन परिस्थितियों में हुई। हम दो कमरे के फ्लैट में रहते थे और हमारा अपना कोई कमरा या कोना नहीं था। लंबे समय बाद यह लाभदायक सिद्ध हुआ। हालांकि मैंने बहुत कम उम्र में ही लोगों के बीच किताब पर ध्यान केंद्रित करना सीख लिया था।
मैंने कभी ज्यादा जुनूनी होकर नहीं पढ़ा...
आज भी मैं शोर में अपना ध्यान केंद्रित कर सकता हूं, लेकिन मैंने कभी ज्यादा जुनूनी होकर नहीं पढ़ा। मेरी मां एक बुक क्लब की सदस्य थीं और दोस्तोयोवस्की और टॉल्सटॉय के उपन्यासों के साथ-साथ हम्सुन, राबे और विकी बाम के उपन्यास घर में उपलब्ध थे। बाद में मैं म्यूनिसिपल लाइब्रेरी जाने लगा, लेकिन मेरी मां के संग्रह की किताबों ने पढ़ने-लिखने के प्रति प्रारंभिक उत्साह जगाया।
-जर्मनी के नोबेलजयी साहित्यकार
8 वर्ष पहले