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अमिताभ को लगी चोट की भयावहता से हरिवंशराय बच्चन वाकिफ़ ही नहीं थे...

दीपाली अग्रवाल

Mud Mud Ke Dekhta Hu
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कुली की शूटिंग के दौरान चोट लगने के बाद से ही अमिताभ बच्चन एक गंभीर और संवेदनशील दौर से गुज़र रहे थे। मामला सिर्फ़ आंत के फ़ट जाने तक नहीं रह गया था। उन्हें निमोनिया और पीलिया ने भी जकड़ लिया था। पूरे शरीर में कई मशीनें लगी थीं और देश अपने सुपरस्टार की सलामती की दुआ कर रहा था।

एक शनिवार को उन्हें चोट लगी थी और दूसरे शनिवार को वह ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती हुए, बीच के इन आठ दिनों में दो ऑपरेशन हुए। लेकिन इन सारी घटनाओं की भयावहता से वृद्ध हरिवंशराय बच्चन वाकिफ़ ही नहीं थे। बंगलौर से जया का फ़ोन पाकर रवाना होने से पहले अजिताभ ने सिर्फ़ अपनी माँ को ही इस बात की जानकारी दी थी। तेजी जी ने भी जाते समय, “मुन्ना को ज़रा चोट लग गई है, देखने जा रही हूँ”, बस इतना कहा था। उनके वापस लौटकर ब्रीच कैंडी में अमिताभ को भरती करते वक़्त भी हरिवंशराय जी को कुछ पता नहीं था।

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2 अगस्त 1982 को अख़बारों में इस घटना को पढ़कर वह बदहवास थे, उस वक़्त उन्हें घटना की जानकारी देने लायक कोई व्यक्ति घर में नहीं था। आख़िरकार उन्होंने अस्पताल में फ़ोन किया। बेटे के वहां भर्ती होने की सही सूचना मिलने पर वह अकेले ही अस्पताल रवाना हो गए। अस्पताल के सामने उन्हें लोगों की भीड़-भाड़ नज़र आई। उन्हें अस्पताल के फ़ाटक पर ही रोक दिया गया। पचहत्तर साल के वृद्ध बच्चन जी ने अस्पताल के चौकादारों से कहा था, “जिसके लिए आज इतनी रोक-टोक है, मैं उसी व्यक्ति का अभागा पिता हूं। मुझे जाने दो।”

दूसरे दिन अस्पताल रवाना होने से ठीक पहले बच्चन जी ने रामचरितमानस की प्रति साथ रख ली। घर से अस्पताल आने-जाने के रास्ते में वह सारे समय रामचरितमानस का पाठ करते रहते। अस्पताल में परिवार के लोगों के लिए एक कमरा दे दिया गया था। उस कमरे में रामचरितमानस ही उनके सारे समय का साथी था। भोजन और नींद के थोड़े से वक़्त के अलावा 24 सितंबर तक बच्च्नजी ने बस रामचरितमानस का ही पाठ किया। उसके बाद जब अमिताभ बच्चन स्वस्थ होकर लौटे तो उनके पिता की आंखों से आंसू छलक पड़े।



साभार- अमिताभ बच्चन (सौम्य बंद्योपाध्याय)
वाणी प्रकाशन
6 वर्ष पहले
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