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ज़ैनब

इश्क़ शायर

Mere Alfaz
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                            एक मासूम सा चेहरा
        
                                                    
                            
कचरे के ढेर पर मुर्दा मिला
बेरहमी से नोचा खसोटा हुआ
बेदर्दी से गला घोंटा हुआ
क्या आपका आज दिल मरा?
पूछिये किसी ने ये क्यों करा?
वो उम्मीदें जिनको आसमानों में उड़ना था
वो ख्वाब जिनको आंखों में पलना था
क्यों नग्न पड़ा है लहू में भीगा सा ज़िस्म
ज़रा सोचिए ! आंखें खोल कर देखिये
आपकी खामोशी ने इसे मारा है
समाज की बेशर्मी ने उघारा है
जानवरों से बदतर इसे नोच खाया है
किसी शैतान का पड़ा इस पर साया है
आँखें खुल नहीं रही आपकी
ये मुर्दा ज़िस्म लेकिन आपको देखता है
आप चुप थे आप चुप ही रहेंगे
किसी से कुछ न कहेंगें
क्योंकि आपसे इसका कोई रिश्ता नहीं था
किसी और की बेटी थी
आपकी बेटी तो आपके घर में है
आपको तो कोई डर भी नहीं है
क्या सच में?
क्या आज शैतान का दिल भर गया
या कहीं जाकर वो मर गया
लेकिन अगर ज़िंदा है तो जरूर वापस आयेगा
फिर किसी ज़िस्म को नोचेगा खायेगा
कल भी बेटी होगी किसी की
दुआ करना आपकी न हो
क्योंकि आप खामोश ही रहेंगे, कुछ न कहेंगे
चाहे कुछ भी हो जाये ज़ुबाँ न खोलना
कभी कुछ न बोलना
लूट जायें बेटियां उनका क्या मोल है
आपकी खामोशी है जो शायद अनमोल है
लेकिन सांप एक दिन आपको काटेगा जरूर
अपना ज़हर आपसे बांटेगा ज़रूर
फिर कोई बेटी का मुर्दा ज़िस्म
ऐसे ही सड़क पर पड़ा होगा
फिर कोई बाप यहाँ बेसुध सा खड़ा होगा
दुआ करना वो आप न हो
किसी के साथ ये पाप न हो

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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