विज्ञापन

ख़ामोशियों से, आजिज आकर।

Yunush khan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            फिर से, बज़्म सजाने लगा है वो।
        
                                                    
                            
किसे, आवाज लगाने लगा है वो।।

हद-ए-निगाह तक कोई नहीं, तो।
क्यूं , खुद को जगाने लगा है वो।।

जुगनुओं पे उसे भरोसा ही नहीं।
यूं ही, चिराग जलाने लगा है वो।।

ख़ामोशियों से, आजिज आकर।
शायद मुझे यूं बुलाने लगा है वो।।
-यूनुस खान
11 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Anita Dasani

15 कविताएं

View Profile

Updesh Kumar

12768 कविताएं

View Profile

Shivendra Mishra

4 कविताएं

View Profile