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जिसने लबों की प्यास बुझायी है।

Yunush khan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            पीता हूं,मगर अब नशा नहीं होता।
        
                                                    
                            
क्या, हर जाम बावफा नहीं होता।।

जिसने लबों की प्यास बुझायी है।
क्यूं उसका हक़, अदा नहीं होता।।
-यूनुस खान
5 घंटे पहले
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