मुझे मुकद्दर से अपने तन्हाई मिली।
दर-ए-तबीब से पीर इंतिहाई मिली।।
मेरे हिस्से,हिज़्र के सिवा कुछ नहीं।
सिर्फ़ ग़ैरों को, तेरी पज़ीराई मिली।।
-यूनुस खान