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अगरचे बज़्म-ए-तरब सजाना चाहे ये दिल।

Yunush khan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ग़म-ए-हिज़्र भी मिला,ग़म-ए-जुदाई के बाद।
        
                                                    
                            
क्या देखना यह गया, इस रूसवाई के बाद।।

अगरचे बज़्म-ए-तरब सजाना चाहे ये दिल।
महफ़िल अच्छी नहीं लगती,तन्हाई के बाद।।
-यूनुस खान
एक घंटा पहले
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