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अगरचे बज़्म-ए-तरब सजाना चाहे ये दिल।

                
                                                         
                            ग़म-ए-हिज़्र भी मिला,ग़म-ए-जुदाई के बाद।
                                                                 
                            
क्या देखना यह गया, इस रूसवाई के बाद।।

अगरचे बज़्म-ए-तरब सजाना चाहे ये दिल।
महफ़िल अच्छी नहीं लगती,तन्हाई के बाद।।
-यूनुस खान
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37 मिनट पहले

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