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माज़ी को समेटे है,हर शजर गांव का।।

Yunush khan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            गुफ्तगू से जाता नहीं , असर गांव का।
        
                                                    
                            
माज़ी को समेटे है,हर शजर गांव का।।

क्यूं , गैर होकर भी अपना लगता था।
किस कदर करीब था, बशर गांव का।।
-यूनुस खान
2 घंटे पहले
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