विज्ञापन

ख़ुद-ब-ख़ुद,क़ैद-बाम-ओ-दर हो जाऊंगा।।

Yunush khan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मुक़ाबिल होते ही , इधर-उधर हो जांऊगा।
        
                                                    
                            
ख़ुद-ब-ख़ुद,क़ैद-बाम-ओ-दर हो जाऊंगा।।

आंखें हैं , मगर तू ना-बीना समझ मुझको।
अगरचे बा-खबर हूं , बे-खबर हो जाऊंगा।।
-यूनुस खान
एक घंटा पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Anurag vishwkarma (aiyaar)

8 कविताएं

View Profile

Priya Mehra

1 कविता

View Profile