एक मुद्दत से,हर सिम्त निहार रहा हूं।
जाने कब से , तुझको पुकारा रहा हूं।।
तेरी कुरबत का जो नशा था मुझको।
अपने उस सुरुर को मै उतार रहा हूं।।
-यूनुस खान