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तेरी कुरबत का जो नशा था मुझको।

Yunush khan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            एक मुद्दत से,हर सिम्त निहार रहा हूं।
        
                                                    
                            
जाने कब से , तुझको पुकारा रहा हूं।।

तेरी कुरबत का जो नशा था मुझको।
अपने उस सुरुर को मै उतार रहा हूं।।
-यूनुस खान
3 घंटे पहले
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