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घर जैसी बात

Yunush khan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            यक़ीनन,घर जैसी बात होती है।
        
                                                    
                            
जब , तुझसे मुलाकात होती है।।

दिन की तन्हाई कम खलती है।
ना पूछ, जब-जब रात होती है।।

मेरा आंगन , सूखा ही रहता है।
पर, हर जगह बरसात होती है।।
-यूनुस खान
एक घंटा पहले
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