विज्ञापन

आसमां के तले मेरा ठिकाना पड़ता है।।

Yunush khan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अंधेरों से भी अक्सर निभाना पड़ता है।
        
                                                    
                            
राह-ए-हयात में दीप जलाना पड़ता है।।

मेरे घर का , कोई मुश्तकिल पता नहीं।
आसमां के तले मेरा ठिकाना पड़ता है।।
-यूनुस खान
एक घंटा पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

samarth dalela

2 कविताएं

View Profile