अंधेरों से भी अक्सर निभाना पड़ता है।
राह-ए-हयात में दीप जलाना पड़ता है।।
मेरे घर का , कोई मुश्तकिल पता नहीं।
आसमां के तले मेरा ठिकाना पड़ता है।।
-यूनुस खान
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