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मैंने पाया , चिराग-ओ-माहताब में उसको।

Yunush khan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हां मैंने देखा था एक रात ख्वाब में उसको।
        
                                                    
                            
ढूंढ रहा हूं रिसाले और किताब में उसको।।

ये रौनक, ये उजाले,सब हैं उसी के दम से।
मैंने पाया , चिराग-ओ-माहताब में उसको।।
-यूनुस खान
एक घंटा पहले
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