विज्ञापन

चिराग से ही काम चलाना पड़ा।

Yunush khan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            रात है,नींद है,पर ख्वाब नही है।
        
                                                    
                            
क्यूं मुझे, सुकूं दस्तयाब नही है।।

चिराग से ही काम चलाना पड़ा।
मुकद्दर में मेरे , माहताब नही है।।
-यूनुस खान
एक महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Manju Sharma

3563 कविताएं

View Profile