रात है,नींद है,पर ख्वाब नही है।
क्यूं मुझे, सुकूं दस्तयाब नही है।।
चिराग से ही काम चलाना पड़ा।
मुकद्दर में मेरे , माहताब नही है।।
-यूनुस खान
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