विज्ञापन

आदत है मुझे

Yunush khan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हस्ब-ए-हालात, ढलने की आदत है मुझे।
        
                                                    
                            
गिर-गिर कर संभलने की आदत है मुझे।।

हर हाल में हर एक वादा निभाया है मैंने।
ये ना सोच, यूं बदलने की आदत है मुझे।।

घर की खातिर , खुद को जलाया है मैंने।
ऐसा नहीं , कि जलने की आदत है मुझे।।

गर तुम चाहो तो तन्हा छोड़ दो सफर में।
अब तो अकेले चलने की आदत है मुझे।।
-यूनुस खान
3 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Anil Pandey

416 कविताएं

View Profile

RATAN KUMAR

637 कविताएं

View Profile